प्रकृति और मैं

  आज दो साल बाद फिर उन रास्तों से गुफ़्तगू कि। . अच्छा लगा ये जान कर की वो रास्ते आज भी मुझे भूले नही है। . जरा सा मुस्कुराया क्या मैंने वो रास्ते में मिला करते थे जो पेड़, खिलखिला उठे। हवाओं का रुख तो देखने लायक था, आज भी वही तेजी थी उसमे…